रिपोर्ट: हरी शंकर शर्मा
कानपुर। विश्व एनेस्थीसिया दिवस के अवसर पर चिकित्सकों ने आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में एनेस्थीसिया की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। विशेषज्ञों ने बताया कि एनेस्थीसियोलॉजिस्ट की जिम्मेदारी केवल ऑपरेशन के दौरान मरीज को बेहोश करने तक सीमित नहीं है, बल्कि सर्जरी से पहले मरीज की स्वास्थ्य स्थिति का आकलन करने, ऑपरेशन के दौरान उसकी सुरक्षा बनाए रखने और सर्जरी के बाद सुरक्षित रिकवरी सुनिश्चित करने तक होती है।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर के एनेस्थीसियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार वर्मा ने कहा कि किसी बीमारी के उपचार में सर्जरी जितनी महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी मरीज की सुरक्षा और बिना गंभीर जटिलताओं के स्वस्थ होकर घर लौटना भी है। आधुनिक एनेस्थीसिया ने सर्जरी को पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और आरामदायक बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
ऑपरेशन से पहले एनेस्थीसिया की जांच जरूरी
डॉ. अनिल कुमार वर्मा ने बताया कि ऑपरेशन से पहले की जाने वाली एनेस्थीसिया संबंधी जांच को ‘प्री-एनेस्थेटिक चेकअप’ कहा जाता है। यह जांच मरीज की स्वास्थ्य स्थिति का आकलन करने और संभावित जोखिमों की पहचान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उन्होंने मरीजों से अपील की कि वे एनेस्थीसियोलॉजिस्ट को अपनी पुरानी बीमारियों, नियमित रूप से ली जा रही दवाओं, एलर्जी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में पूरी जानकारी दें। अधूरी मेडिकल हिस्ट्री के कारण हृदय, फेफड़े, गुर्दे या शरीर के अन्य अंगों से जुड़ी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। सही जानकारी मिलने से चिकित्सक मरीज की स्थिति के अनुरूप एनेस्थीसिया की योजना तैयार कर सकते हैं।
आधुनिक तकनीकों से दर्द प्रबंधन हुआ बेहतर
डॉ. वर्मा ने बताया कि आधुनिक एनेस्थीसिया तकनीकों और दर्द प्रबंधन के तरीकों से ऑपरेशन के दौरान ही नहीं, बल्कि सर्जरी के बाद भी दर्द को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इससे मरीज को उपचार के दौरान अधिक आराम मिलता है और रिकवरी में सहायता मिलती है।
उन्होंने कहा कि एनेस्थीसियोलॉजी को व्यापक अर्थों में ‘पेरीऑपरेटिव मेडिसिन’ भी कहा जाता है। इसका दायरा सर्जरी से पहले मरीज की तैयारी, ऑपरेशन के दौरान लगातार निगरानी और सर्जरी के बाद सुरक्षित रिकवरी तक फैला हुआ है।
मरीज की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
विशेषज्ञों के अनुसार, एनेस्थीसियोलॉजिस्ट ऑपरेशन के दौरान मरीज की महत्वपूर्ण शारीरिक गतिविधियों और स्वास्थ्य संकेतों की निगरानी करते हैं। उनका उद्देश्य संभावित जटिलताओं के जोखिम को कम करना, दर्द को नियंत्रित करना और उपचार को सुरक्षित बनाना है।
डॉ. अनिल कुमार वर्मा ने कहा कि एनेस्थीसियोलॉजी का मूल उद्देश्य केवल बेहोशी देना नहीं, बल्कि मरीज की संपूर्ण स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित उपचार सुनिश्चित करना है। सुरक्षित एनेस्थीसिया, प्रभावी दर्द नियंत्रण और जीवन की रक्षा इस चिकित्सा विधा की प्रमुख प्रतिबद्धताएं हैं।





