दो दिवसीय अभियान में परिवहन विभाग की कार्रवाई, सुरक्षा मानकों और परमिट नियमों के उल्लंघन पर रही नजर।
रिपोर्ट: हरी शंकर शर्मा
कानपुर। यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और सड़क दुर्घटनाओं की आशंका कम करने के उद्देश्य से परिवहन विभाग ने ऑपरेशन कवच 3.0 के तहत यात्री बसों के खिलाफ विशेष जांच अभियान चलाया। 16 और 17 अक्टूबर को संचालित दो दिवसीय अभियान के दौरान कानपुर नगर में प्रवर्तन अधिकारियों ने 65 बसों के चालान किए, जबकि 10 बसों को निरुद्ध कर दिया गया।
परिवहन आयुक्त, उत्तर प्रदेश के निर्देश पर प्रदेशव्यापी स्तर पर चलाए गए इस अभियान का उद्देश्य यात्री बसों का संचालन निर्धारित नियमों और सुरक्षा मानकों के अनुरूप सुनिश्चित करना था। जांच के दौरान बसों की फिटनेस, परमिट और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न प्रावधानों पर विशेष ध्यान दिया गया।
क्षमता से अधिक सीटें और आपातकालीन निकास की जांच
अभियान के दौरान बसों में निर्धारित क्षमता से अधिक सीटें और स्लीपर लगाए जाने के मामलों की जांच की गई। इसके अलावा आपातकालीन निकास की उपलब्धता और उसके सही तरीके से काम करने की स्थिति भी देखी गई।
परिवहन विभाग ने बसों में अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता और उनकी कार्यशील स्थिति की भी जांच की। बिना परमिट बसों का संचालन, परमिट की शर्तों का उल्लंघन और अन्य सुरक्षा मानकों में कमी पाए जाने पर कार्रवाई की गई।
बस बॉडी कोड के नियमों पर जोर
जांच अभियान में बस बॉडी कोड एआईएस-119, एआईएस-135 और एआईएस-052 के प्रावधानों के अनुरूप वाहनों के संचालन पर भी जोर दिया गया। विभाग ने बस संचालकों को निर्धारित तकनीकी और सुरक्षा मानकों का पालन करने का संदेश दिया।
इसके साथ ही बसों की छत या कैरियर पर निर्धारित सीमा से अधिक ऊंचाई तक सामान लादकर चलने वाले वाहनों को भी सड़क सुरक्षा के लिहाज से गंभीर माना गया। इस तरह की लापरवाही से वाहन का संतुलन प्रभावित होने और सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ने की आशंका रहती है।
सुरक्षित यात्री परिवहन सुनिश्चित करने की पहल
परिवहन विभाग के अनुसार, यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ प्रवर्तन कार्रवाई जारी है। ऑपरेशन कवच 3.0 के तहत की गई कार्रवाई का उद्देश्य बस संचालकों को नियमों के पालन के प्रति गंभीर करना और यात्रियों के लिए सुरक्षित परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
विभाग की इस कार्रवाई से यात्री बसों के संचालन में सुरक्षा मानकों के पालन और नियमित निगरानी की आवश्यकता एक बार फिर सामने आई है।





