रिपोर्ट: हरी शंकर शर्मा
कानपुर। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में बुधवार को “साइलेंट स्पाइक: डीलिंग विद डेडली एब्रप्शन” विषय पर शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य गर्भावस्था के दौरान होने वाली गंभीर और जीवन-घातक जटिलता अब्रप्शियो प्लेसेंटी के प्रति चिकित्सकों एवं मेडिकल विद्यार्थियों को जागरूक करना तथा समय पर पहचान, त्वरित उपचार और बेहतर मातृ-शिशु स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के उपायों पर चर्चा करना रहा।
कार्यक्रम में स्त्री रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ. सीमा द्विवेदी ने बताया कि अब्रप्शियो प्लेसेंटी ऐसी स्थिति है, जिसमें प्रसव से पहले गर्भाशय की दीवार से सामान्य रूप से स्थित अपरा (प्लेसेंटा) आंशिक या पूरी तरह अलग हो जाती है। इसके कारण गर्भवती महिला को गंभीर रक्तस्राव हो सकता है और गर्भस्थ शिशु तक ऑक्सीजन एवं पोषक तत्वों की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसे प्रसूति विज्ञान की एक महत्वपूर्ण आपातकालीन स्थिति माना जाता है।
0.4 से 1 प्रतिशत गर्भावस्थाओं में हो सकती है यह जटिलता
डॉ. सीमा द्विवेदी ने बताया कि उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों के अनुसार, लगभग 0.4 से 1 प्रतिशत गर्भावस्थाएं इस जटिलता से प्रभावित होती हैं। हालांकि, इसकी दर अलग-अलग आबादी और अस्पतालों में भिन्न हो सकती है। यह गर्भावस्था के उत्तरार्ध में रक्तस्राव का एक महत्वपूर्ण कारण है और इससे मां तथा नवजात शिशु में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।
उन्होंने बताया कि योनि से रक्तस्राव, पेट या पीठ में अचानक दर्द, गर्भाशय में दर्द अथवा लगातार कसाव और भ्रूण की हृदय गति में असामान्यता इसके प्रमुख लक्षण हो सकते हैं। कुछ मामलों में रक्तस्राव गर्भाशय के भीतर ही छिपा रह सकता है। ऐसे में बाहर दिखाई देने वाला रक्तस्राव बीमारी की गंभीरता का सही अनुमान नहीं दे पाता। इसी वजह से इस स्थिति की समय पर पहचान और चिकित्सकीय निगरानी बेहद जरूरी है।
समय पर उपचार से बचाई जा सकती है मां और बच्चे की जान
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ. शैली अग्रवाल ने अब्रप्शियो प्लेसेंटी की शीघ्र पहचान, गर्भवती महिला की स्थिति का तत्काल आकलन, भ्रूण की हृदय गति की निगरानी और रक्तस्राव से संबंधित जटिलताओं के प्रबंधन पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने आवश्यकता के अनुसार शीघ्र प्रसव कराने और समय पर उचित चिकित्सकीय निर्णय लेने की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. किरण पांडे, अध्यक्ष, यूपीकॉग्स एवं कानपुर मेनोपॉज सोसाइटी रहीं। आयोजन डॉ. सीमा द्विवेदी, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. नीना गुप्ता, डॉ. रेनू गुप्ता एवं डॉ. वंदना शर्मा ने की।
इस शैक्षणिक कार्यक्रम के माध्यम से चिकित्सकों और मेडिकल विद्यार्थियों को गर्भावस्था की गंभीर जटिलताओं के प्रति सतर्क रहने, समय रहते लक्षणों को पहचानने और मां एवं शिशु की सुरक्षा के लिए त्वरित उपचार सुनिश्चित करने का संदेश दिया गया।





