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कानपुर: 90 वर्षीय महिला की पित्त की नली से निकाली बड़ी पथरी

ईआरसीपी तकनीक से 2 सेंटीमीटर की पथरी को छोटे टुकड़ों में तोड़कर किया गया साफ, बिना ऑपरेशन मिली राहत

रिपोर्ट: हरी शंकर शर्मा 

कानपुर। जीएसवीएम सुपर स्पेशियलिटी पीजीआई, कानपुर के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के चिकित्सकों ने आधुनिक चिकित्सा तकनीक की मदद से 90 वर्षीय बुजुर्ग महिला की पित्त की नली में फंसी बड़ी पथरी को बिना ऑपरेशन निकालने में सफलता हासिल की है। महिला पेट दर्द, पीलिया और तेज ठंड के साथ बुखार की समस्या से पीड़ित थी। जांच में पित्त की नली में करीब 2 सेंटीमीटर की बड़ी पथरी फंसी मिली, जिसके कारण संक्रमण और मवाद बनने की समस्या भी हो गई थी।

मरीज की अधिक उम्र और स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए पारंपरिक ऑपरेशन को उपयुक्त नहीं माना गया। इसके बाद गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार ने स्पाई ग्लास एंडोस्कोपी और इलेक्ट्रो हाइड्रोलिक लिथोट्रिप्सी तकनीक से इलाज करने का निर्णय लिया।

30 मिनट में पूरी हुई जटिल प्रक्रिया

बुधवार को डॉ. विनय कुमार के नेतृत्व में डॉ. ध्रुव ठाकुर और डॉ. सत्यम कुमार सिंह की टीम ने प्रक्रिया को अंजाम दिया। स्पाई ग्लास एंडोस्कोप की सहायता से पित्त की नली के अंदर फंसी पथरी को देखा गया। इसके बाद इलेक्ट्रो हाइड्रोलिक लिथोट्रिप्सी तकनीक से बड़ी पथरी को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ा गया और ईआरसीपी (ERCP) प्रक्रिया के माध्यम से पित्त की नली को साफ किया गया।

पूरी प्रक्रिया में करीब 30 मिनट का समय लगा। उपचार के बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हो रहा है। इस उपलब्धि पर जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग की पूरी टीम को बधाई दी।

क्या है स्पाई ग्लास एंडोस्कोपी?

स्पाई ग्लास एंडोस्कोपी एक आधुनिक चिकित्सा तकनीक है, जिसमें बेहद पतली और लचीली ट्यूब के सिरे पर लगे कैमरे की मदद से पित्त की नली के अंदर का सीधा दृश्य देखा जा सकता है। इससे पथरी की स्थिति, आकार और अन्य समस्याओं की पहचान करने में मदद मिलती है। जरूरत के अनुसार इसे ईआरसीपी प्रक्रिया के साथ इस्तेमाल किया जाता है।

किन बीमारियों में उपयोगी है यह तकनीक?

गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार के अनुसार, स्पाई ग्लास एंडोस्कोपी कई महत्वपूर्ण स्थितियों में उपयोगी है। इसकी मदद से पित्त की नली में फंसी बड़ी पथरी की पहचान कर उसे तोड़कर निकाला जा सकता है। इसके अलावा पित्त नली के कैंसर या ट्यूमर की पहचान, नली में संकुचन या रुकावट के कारणों का पता लगाने, स्टेंट लगाने में मार्गदर्शन और बायोप्सी के लिए ऊतक का नमूना लेने में भी इसका उपयोग किया जाता है।

इस सफल उपचार से स्पष्ट होता है कि आधुनिक एंडोस्कोपिक तकनीक कुछ जटिल मामलों में बिना पारंपरिक ऑपरेशन के इलाज का विकल्प उपलब्ध करा सकती है। हालांकि, उपचार का निर्णय मरीज की स्थिति और चिकित्सकीय जांच के आधार पर लिया जाता है।

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