रिपोर्ट: शैलेन्द्र शानू वर्मा
बांदा। कमासिन विकासखंड की ग्राम पंचायत तिलौसा में विकास कार्यों और सरकारी धनराशि के भुगतान को लेकर कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला फिर चर्चा में है। ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान अंशू देवी और ग्राम पंचायत सचिव धर्मेंद्र प्रजापति पर करीब 50 लाख रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से शिकायत की है। ग्रामीणों ने 30 बिंदुओं पर निष्पक्ष जांच कराने और अनियमितता प्रमाणित होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पूर्व में सात लाख रुपये से अधिक की कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई और मामला चेतावनी तक सीमित रह गया। हालांकि, पूर्व जांच की रिपोर्ट, उसमें दर्ज निष्कर्षों और की गई कार्रवाई की आधिकारिक स्थिति संबंधित अभिलेखों से सत्यापित किया जाना बाकी है।
पूर्व जांच के बाद कार्रवाई पर उठे सवाल
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, बीते वर्ष ग्राम पंचायत सदस्यों और ग्रामीणों ने तत्कालीन जिलाधिकारी जे. रिभा से पंचायत के विकास कार्यों में कथित भ्रष्टाचार की शिकायत की थी। इसके बाद पशु चिकित्सा अधिकारी और लोक निर्माण विभाग के अवर अभियंता को जांच सौंपी गई थी।
ग्रामीणों का दावा है कि जांच में सात लाख रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितताएं सामने आई थीं और इसकी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी गई थी। आरोप है कि इसके बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के बजाय चेतावनी देकर प्रकरण निस्तारित कर दिया गया। ग्रामीणों ने अब पूर्व जांच और उस पर हुई कार्रवाई का पूरा ब्योरा सार्वजनिक किए जाने की मांग की है।
30 बिंदुओं पर जांच की मांग
ग्रामीणों ने वर्तमान जिलाधिकारी को दिए गए शिकायती पत्र में खेल मैदान, सीसी रोड, स्ट्रीट लाइट, वृक्षारोपण, हैंडपंप रिबोर, सफाई व्यवस्था, कूड़ादान खरीद, फॉगिंग मशीन, आंगनबाड़ी केंद्र, गोशाला, आरआरसी सेंटर और हाट-बाजार सहित विभिन्न विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की है।
शिकायतकर्ताओं ने आशंका जताई है कि कुछ विकास कार्यों के नाम पर जारी धनराशि ग्राम प्रधान, उनके पति और परिजनों के खातों में भेजी गई हो सकती है। मनरेगा मजदूरी के भुगतान में भी गड़बड़ी का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों का दावा है कि मजदूरी के नाम पर जारी धनराशि प्रधान और उनके पति के खातों में पहुंचाई गई। उन्होंने इन आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित बैंक खातों और सरकारी अभिलेखों की जांच कराने की मांग की है।
मनरेगा जॉब कार्ड और आवास योजना पर भी सवाल
मामले में ग्राम प्रधान के जेठ के जॉब कार्ड को लेकर भी शिकायतकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित व्यक्ति का जॉब कार्ड अनुसूचित जाति की श्रेणी में बनाया गया। इस आरोप की पुष्टि संबंधित सरकारी रिकॉर्ड की जांच से ही हो सकेगी।
ग्रामीणों ने मनरेगा जॉब कार्ड, मस्टर रोल, मजदूरी भुगतान, प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों की पात्रता, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, जियो-टैग तस्वीरों और एक ही कार्य के लिए दोहरे भुगतान की आशंका की जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही बिल-वाउचर, बैंक खातों और सरकारी अभिलेखों का मिलान करने तथा मौके पर कराए गए कार्यों का भौतिक सत्यापन कराने पर जोर दिया गया है।
न्यायालय तक पहुंचा मामला, अब जिलाधिकारी से उम्मीद
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, पूर्व में प्रभावी कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने न्यायालय का सहारा लिया है। उनका दावा है कि इस मामले में पंचायत राज विभाग की ओर से जवाब भी दाखिल किया गया है। हालांकि, न्यायालय में मामले की वर्तमान स्थिति और दाखिल जवाब का विवरण उपलब्ध अभिलेखों से सत्यापित किया जाना बाकी है।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से वरिष्ठ अधिकारियों की टीम गठित कर समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में सरकारी धन के दुरुपयोग या वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार धनराशि की वसूली और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। शिकायतकर्ताओं ने दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का अनुरोध भी किया है।
जांच से ही स्पष्ट होगी सरकारी धन के खर्च की सच्चाई
तिलौसा पंचायत का मामला अब केवल विकास कार्यों में कथित गड़बड़ी के आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूर्व जांच और उसके बाद की गई कार्रवाई पर भी सवाल उठा रहा है। यदि सात लाख रुपये से अधिक की कथित अनियमितताओं के संबंध में पूर्व में जांच हुई थी, तो उसकी रिपोर्ट और कार्रवाई का विवरण सामने आना आवश्यक है।
वहीं, करीब 50 लाख रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की निष्पक्ष जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल ग्रामीणों की मांग है कि पंचायत के विकास कार्यों और भुगतान से जुड़े सभी अभिलेखों की जांच कराई जाए, ताकि सरकारी धन के उपयोग की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
शिकायत के दौरान विजय कुमार, गजराज, महेंद्र सिंह, अरविंद, अकबर और मातगजन सहित दर्जनों ग्रामीण मौजूद रहे।





