रिपोर्ट: शैलेन्द्र शानू वर्मा
बांदा। जिले की नरैनी तहसील क्षेत्र में करतल रोड स्थित नहरी अकेलवा के पास संचालित गोल्ड मोहर रिसॉर्ट एक बार फिर जमीन विवाद और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर चर्चा में है। मामले में जमीन के अधिकार, राजस्व न्यायालय के आदेशों के अनुपालन और हाल में दर्ज एफआईआर को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं, एक पत्रकार का नाम भी प्रकरण से जुड़ने के बाद पत्रकार संगठन ने जिलाधिकारी और डीआईजी को ज्ञापन देकर निष्पक्ष जांच तथा न्याय की मांग की है।
राजस्व न्यायालय के आदेशों के अनुपालन पर सवाल
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ग्राम नहरी, तहसील नरैनी, जिला बांदा निवासी आशारानी पत्नी शिवकुमार ने जमीन पर दखल-दहानी कराए जाने के संबंध में उपजिलाधिकारी नरैनी के न्यायालय में वाद दायर किया था। बताया गया है कि मामले में 5 दिसंबर 2023 को कुर्रा-फांट का आदेश पारित हुआ और 5 जनवरी 2024 को उस पर अमल किया गया। इसके बाद 24 मई 2024 को अंतिम आदेश पारित होने की बात कही गई है।
शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि आदेश पारित होने के बावजूद उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिली। इसके बाद 24 जून 2024 को राजस्व निरीक्षक को दोबारा कार्रवाई के लिए आदेशित किए जाने की जानकारी सामने आई। हालांकि, शिकायतकर्ता के अनुसार समस्या का समाधान नहीं हो सका। ऐसे में राजस्व अभिलेखों और आदेशों के अनुपालन की स्थिति की निष्पक्ष समीक्षा की मांग उठ रही है।
एफआईआर दर्ज होने के बाद मामले ने लिया नया मोड़
प्रकरण में उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 18 जुलाई 2026 को नरैनी कोतवाली में एफआईआर संख्या 0187 दर्ज कराई गई। इस घटनाक्रम के बाद जमीन विवाद से जुड़े मामले में नया मोड़ आने की बात कही जा रही है। पत्रकार रामकिशोर उपाध्याय का नाम भी प्रकरण से जुड़ने के बाद मामले ने मीडिया जगत का ध्यान आकर्षित किया है।
हालांकि, एफआईआर में लगाए गए आरोपों, संबंधित पक्षों की भूमिका और पूरे घटनाक्रम की वास्तविकता का निर्धारण पुलिस जांच तथा उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही किया जा सकता है। किसी भी पक्ष के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को जांच पूरी होने से पहले प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
पत्रकार संगठन ने डीएम और डीआईजी से मांगा न्याय
14 अक्टूबर 2026 को एक पत्रकार संगठन की ओर से जिलाधिकारी और डीआईजी को ज्ञापन दिए जाने की जानकारी सामने आई है। ज्ञापन के माध्यम से संबंधित पत्रकार के मामले में निष्पक्ष जांच और न्याय सुनिश्चित करने की मांग की गई। पत्रकारों का पक्ष है कि पूरे प्रकरण की तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर जांच होनी चाहिए, ताकि किसी के साथ अन्याय न हो।
रिसॉर्ट को लेकर ग्रामीण पहले भी उठा चुके हैं सवाल
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, उदई पुरवा निवासी विजय द्विवेदी, देवराज द्विवेदी, गुलाब प्रसाद द्विवेदी, बाबूजी, अवधेश समेत अन्य लोगों ने भी पूर्व में रिसॉर्ट को लेकर विभिन्न शिकायतें और आरोप लगाए थे। ग्रामीणों ने रिसॉर्ट के संचालन से जुड़े नियमों, सरकारी भूमि तथा निजी जमीन पर कथित कब्जे के प्रयासों को लेकर सवाल उठाए थे।
कुछ ग्रामीणों का यह भी आरोप रहा है कि जमीन से संबंधित विवादों में विरोध करने वाले लोगों को परेशान किया जाता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए राजस्व अभिलेखों, भूमि की पैमाइश तथा संबंधित विभागों की रिपोर्ट की जांच आवश्यक है।
प्रशासन की भूमिका पर टिकी निगाहें
पूरे प्रकरण में अब प्रमुख सवाल यह है कि राजस्व न्यायालय के आदेशों का कितना अनुपालन हुआ, संबंधित भूमि की वर्तमान स्थिति क्या है और एफआईआर में दर्ज आरोपों के संबंध में जांच कहां तक पहुंची है। साथ ही, रिसॉर्ट के संचालन से जुड़े नियमों तथा सरकारी या निजी भूमि पर कब्जे के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।





