रिपोर्ट: हरी शंकर शर्मा
कानपुर। जी.एस.वी.एम. मेडिकल कॉलेज, कानपुर के फार्माकोलॉजी विभाग में “Pharmacogenomics: Towards Personalised Drug Therapy” (फार्माकोजीनोमिक्स: व्यक्तिगत औषधि चिकित्सा की दिशा में) विषय पर शैक्षणिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें विशेषज्ञों ने आधुनिक चिकित्सा में फार्माकोजीनोमिक्स की बढ़ती उपयोगिता और रोगियों की आनुवंशिक संरचना के अनुरूप दवाओं के चयन पर विस्तार से चर्चा की।
संगोष्ठी में बताया गया कि प्रत्येक व्यक्ति की आनुवंशिक संरचना अलग होती है, जिसके कारण एक ही दवा का प्रभाव और उसके प्रति शरीर की प्रतिक्रिया अलग-अलग हो सकती है। फार्माकोजीनोमिक्स के माध्यम से आनुवंशिक जानकारी के आधार पर दवा का चयन और उसकी खुराक निर्धारित करने में मदद मिल सकती है। इससे उपचार को अधिक प्रभावी एवं सुरक्षित बनाने, दवाओं के संभावित दुष्प्रभावों को कम करने और बेहतर चिकित्सकीय परिणाम प्राप्त करने की संभावनाएं बढ़ती हैं।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य चिकित्सा क्षेत्र में फार्माकोजीनोमिक्स के महत्व तथा व्यक्तिगत औषधि चिकित्सा में इसकी भूमिका के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा। संगोष्ठी का आयोजन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं डीन प्रो. (डॉ.) संजय काला के मार्गदर्शन और फार्माकोलॉजी विभाग के आचार्य एवं विभागाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र कुशवाहा के निर्देशन में किया गया।
इस अवसर पर विभाग की आचार्य डॉ. पूजा अग्रवाल, सहायक आचार्य डॉ. धर्म देव, जूनियर रेजिडेंट तथा महाविद्यालय के अन्य विभागों के संकाय सदस्य उपस्थित रहे। प्रतिभागियों ने फार्माकोजीनोमिक्स के संभावित नैदानिक अनुप्रयोगों, इसकी उपयोगिता और साक्ष्य-आधारित चिकित्सा में इसके योगदान पर अपने विचार साझा किए।
संगोष्ठी में इस बात पर जोर दिया गया कि इस तरह की शैक्षणिक गतिविधियां चिकित्सा शिक्षकों और रेजिडेंट को नवीन वैज्ञानिक प्रगति से परिचित कराने के साथ ही आधुनिक, सुरक्षित और रोगियों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप औषधि चिकित्सा को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।





