रिपोर्ट: शानू वर्मा
बांदा। नवरात्रि पर्व को देखते हुए शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने के जिला प्रशासन के निर्देशों के बीच सड़क सौंदर्यीकरण के दौरान उठे काले धुएं ने लोक निर्माण विभाग (PWD) की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रविवार को कलेक्ट्रेट के सामने संकट मोचन मंदिर से अशोक की लाट और बार कार्यालय मार्ग की ओर चल रहे सड़क निर्माण कार्य के दौरान मशीनरी से घना काला धुआं निकलने की शिकायत सामने आई। स्थानीय लोगों ने इससे आसपास के दुकानदारों, राहगीरों और खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सड़क पर डामर और तारकोल बिछाने के दौरान इस्तेमाल की गई मशीनरी से काफी धुआं निकला, जिससे इलाके में कुछ समय तक धुंध जैसी स्थिति बन गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क किनारे फल, सब्जी, मिठाई, चाय और पान की दुकानें होने के कारण धुएं और धूल का असर खाद्य पदार्थों पर पड़ने की आशंका है। कुछ लोगों ने आंखों में जलन और गले में खराश जैसी परेशानी होने की बात भी कही।
घनी आबादी में निर्माण कार्य के तरीके पर सवाल
शहर के व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्र में डामर संबंधी कार्य के दौरान धुएं के उत्सर्जन को लेकर लोगों ने संबंधित विभाग से स्पष्टीकरण मांगा है। सवाल यह है कि निर्माण कार्य के दौरान प्रदूषण नियंत्रण और आम लोगों की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए गए थे? क्या इस्तेमाल की गई मशीनरी निर्धारित मानकों के अनुरूप थी और क्या कार्यस्थल पर पर्यावरणीय सावधानियां बरती गईं?
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग से मौके का निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। हालांकि, धुएं की वास्तविक प्रकृति, उसमें मौजूद प्रदूषक तत्वों और किसी नियम के उल्लंघन की पुष्टि के लिए तकनीकी जांच तथा संबंधित विभाग का पक्ष सामने आना जरूरी है।
निर्माण की गुणवत्ता और लागत पर भी उठे सवाल
स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों ने सड़क निर्माण की धीमी गति तथा इस्तेमाल की जा रही सामग्री की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि सौंदर्यीकरण पर खर्च होने वाली बड़ी धनराशि के बावजूद निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समय-सीमा पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। हालांकि, बजट, सामग्री की गुणवत्ता और कार्य में अनियमितता संबंधी दावों की पुष्टि आधिकारिक अभिलेखों और तकनीकी जांच से ही हो सकेगी।
पुराने मार्गों की स्थिति को लेकर भी नाराजगी
स्थानीय लोगों ने कालू कुआं चौराहा, बांदा-नरैनी-कालिंजर मार्ग, नरैनी-अतर्रा मार्ग और बांदा-कबरई मार्ग की स्थिति का हवाला देते हुए सड़क निर्माण एवं रखरखाव की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कई स्थानों पर गड्ढों और उखड़ी गिट्टियों के कारण वाहन चालकों को परेशानी होती है और दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
नागरिकों ने संबंधित सड़कों का निरीक्षण कर उनकी स्थिति का आकलन कराने तथा जरूरत पड़ने पर तकनीकी गुणवत्ता जांच कराने की मांग की है।
प्रशासन और PWD से जवाब की मांग
अब सवाल यह है कि नवरात्रि के दौरान शहर को स्वच्छ रखने के निर्देशों के बीच निर्माण स्थल पर धुएं को नियंत्रित करने के लिए क्या व्यवस्था की गई थी? क्या संबंधित अधिकारी मौके का निरीक्षण करेंगे? क्या सड़क निर्माण की गुणवत्ता और पुराने मार्गों की स्थिति की तकनीकी जांच कराई जाएगी?
स्थानीय नागरिकों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग और प्रदूषण नियंत्रण विभाग मामले का संज्ञान लेकर स्थिति स्पष्ट करेंगे। इस संबंध में संबंधित विभागों का आधिकारिक पक्ष और तकनीकी जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही नियमों के उल्लंघन या निर्माण में अनियमितता की पुष्टि हो सकेगी।





