हाथ में लगा था इलाज का कैनुला, मौत के कारणों को लेकर उठे सवाल; निजी क्लीनिक में हुए इलाज की जांच की मांग।
रिपोर्ट: शैलेन्द्र शानू वर्मा
बांदा। चिल्ला सब्जी मंडी में सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब 36 वर्षीय युवक अचानक लड़खड़ाकर जमीन पर गिर पड़ा। मौके पर मौजूद लोगों ने उसे संभालने का प्रयास किया, लेकिन उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई। युवक के हाथ में इलाज के दौरान लगाया गया कैनुला (विगो) लगा हुआ था। पुलिस ने एंबुलेंस की मदद से उसे जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद मृत घोषित कर दिया।
मृतक की पहचान चंद्रिका (36), पुत्र लोटन, निवासी ग्राम एवं पोस्ट गुमानगंज (शहबाजपुर), थाना नरैनी के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि युवक किसी निजी चिकित्सक से इलाज कराने के बाद चिल्ला सब्जी मंडी पहुंचा था। इसी दौरान अचानक उसकी तबीयत बिगड़ी और वह अचेत होकर जमीन पर गिर पड़ा।
घटना की सूचना मिलते ही चिल्ला थाना प्रभारी आनंद साहू पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने स्थानीय लोगों के सहयोग से 108 एंबुलेंस बुलवाई और युवक को जिला अस्पताल भिजवाया। हालांकि, चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया।
हाथ में लगे कैनुला ने खड़े किए सवाल
युवक के हाथ में लगा कैनुला अब उसके इलाज को लेकर कई सवाल खड़े कर रहा है। आखिर युवक किस बीमारी से पीड़ित था? उसका इलाज किस निजी चिकित्सक या क्लीनिक में चल रहा था? क्या संबंधित क्लीनिक स्वास्थ्य विभाग में पंजीकृत था और इलाज करने वाला व्यक्ति योग्य चिकित्सक था? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।
कथित झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई की मांग
घटना के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में बिना पंजीकरण संचालित होने वाले कथित क्लीनिकों और अपात्र व्यक्तियों द्वारा इलाज किए जाने की आशंकाओं को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, युवक के इलाज से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल करने और यदि किसी प्रकार की लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
फिलहाल युवक की मौत का वास्तविक कारण स्पष्ट नहीं है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की जांच के बाद ही मौत की वजह का पता चल सकेगा। यह भी जांच का विषय है कि युवक का इलाज कहां हुआ था और उसकी तबीयत बिगड़ने के पीछे क्या कारण रहे।
सवाल यह है कि क्या स्वास्थ्य विभाग इस घटना को गंभीरता से लेते हुए संबंधित निजी क्लीनिक और इलाज करने वाले व्यक्ति की जांच कराएगा, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके?





