रिपोर्ट: हरी शंकर शर्मा
कानपुर। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर के फार्माकोलॉजी विभाग की ओर से चिकित्सकीय उपचार की गुणवत्ता, मरीजों की सुरक्षा और दवाओं के तर्कसंगत उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘प्रिस्क्रिप्शन ऑडिट’ विषय पर शैक्षणिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन कॉलेज के प्राचार्य एवं डीन प्रो. (डॉ.) संजय काला के मार्गदर्शन तथा फार्माकोलॉजी विभाग के आचार्य एवं विभागाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र कुशवाहा के निर्देशन में किया गया।
संगोष्ठी में प्रिस्क्रिप्शन ऑडिट की आवश्यकता, उसकी प्रक्रिया और चिकित्सकीय सेवाओं की गुणवत्ता में उसकी भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि चिकित्सकीय पर्चों का व्यवस्थित मूल्यांकन करने से दवाओं के उचित चयन, सही खुराक, उपचार की अवधि और संभावित दुष्प्रभावों की पहचान करने में मदद मिलती है। इससे मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ उपचार की गुणवत्ता में भी सुधार किया जा सकता है।
इस अवसर पर विभागाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र कुशवाहा ने तर्कसंगत औषधि उपयोग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रिस्क्रिप्शन ऑडिट मरीजों को सुरक्षित, प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उन्होंने एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) की बढ़ती चुनौती का उल्लेख करते हुए कहा कि एंटीबायोटिक्स का विवेकपूर्ण और आवश्यकता के अनुसार उपयोग बेहद जरूरी है। इसके लिए चिकित्सकीय पर्चों का नियमित मूल्यांकन आवश्यक है।
कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि प्रिस्क्रिप्शन ऑडिट को नियमित चिकित्सकीय कार्यप्रणाली का अभिन्न हिस्सा बनाकर मरीजों की सुरक्षा, दवाओं के उचित उपयोग और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता है।





