रिपोर्ट: हरी शंकर शर्मा
कानपुर। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर को चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। कॉलेज के फार्माकोलॉजी विभाग को मटेरियोविजिलेंस प्रोग्राम ऑफ इंडिया (MvPI) के अंतर्गत मेडिकल डिवाइस एडवर्स इवेंट मॉनिटरिंग सेंटर (MDMC) स्थापित करने की स्वीकृति प्रदान की गई है। यह स्वीकृति भारत सरकार के इंडियन फार्माकोपिया कमीशन (IPC) के नेशनल कोऑर्डिनेटिंग सेंटर द्वारा दी गई है।
इस केंद्र के माध्यम से चिकित्सा उपकरणों के उपयोग से संबंधित प्रतिकूल घटनाओं की पहचान, निगरानी और रिपोर्टिंग को व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही, चिकित्सा उपकरणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और मरीजों के हितों की रक्षा करने की दिशा में भी यह महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कार्यशाला में प्रतिकूल घटनाओं की रिपोर्टिंग की दी गई जानकारी
इस उपलब्धि के अवसर पर जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के फार्माकोलॉजी विभाग में मटेरियोविजिलेंस के तहत प्रतिकूल घटनाओं की रिपोर्टिंग और रिपोर्टिंग फॉर्म भरने की प्रक्रिया पर एक कार्यशाला आयोजित की गई।
फार्माकोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. धरमदेव ने बताया कि कार्यशाला में चिकित्सा उपकरणों के इस्तेमाल से होने वाली संभावित प्रतिकूल घटनाओं की पहचान, उनका उचित दस्तावेजीकरण और संबंधित अधिकारियों तक रिपोर्ट पहुंचाने की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को रिपोर्टिंग फॉर्म सही तरीके से भरने का प्रशिक्षण भी दिया गया।
रोजमर्रा के चिकित्सा उपकरणों की सुरक्षा पर जोर
कार्यशाला में बताया गया कि चिकित्सा उपकरणों की सुरक्षा का दायरा काफी व्यापक है। इसमें थर्मामीटर, बीपी मशीन, सिरिंज, इन्फ्यूजन पंप, पेसमेकर, प्रत्यारोपण योग्य उपकरण, वेंटिलेटर, कॉपर-टी और प्रयोगशालाओं में जांच के लिए इस्तेमाल होने वाले इन-विट्रो डायग्नोस्टिक (IVD) उपकरण शामिल हैं।
इन उपकरणों के उपयोग के दौरान किसी प्रकार की प्रतिकूल घटना सामने आने पर उसकी समय पर पहचान और उचित रिपोर्टिंग बेहद महत्वपूर्ण होती है। इससे उपकरणों से जुड़े संभावित जोखिमों का आकलन करने और मरीजों की सुरक्षा को बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है।
छात्रों और चिकित्सकों ने लिया हिस्सा
कार्यशाला में एमबीबीएस के छात्र-छात्राओं, जूनियर रेजिडेंट्स, विभागाध्यक्ष और फार्माकोलॉजी विभाग के समस्त संकाय सदस्यों ने सहभागिता की।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में इस केंद्र की स्वीकृति से चिकित्सा उपकरणों की सुरक्षा निगरानी और प्रतिकूल घटनाओं की रिपोर्टिंग को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। इससे चिकित्सकों और चिकित्सा विद्यार्थियों में उपकरणों के सुरक्षित उपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।





