कानपुर। नाम दीपक था और जाते-जाते वह दो लोगों की जिंदगी में रोशनी लाने का माध्यम बन गए। आगरा निवासी 57 वर्षीय व्यवसायी स्व. दीपक भगत ने दुनिया से विदा लेने के बाद भी मानवता और परोपकार की मिसाल पेश की। उनके निधन के बाद परिजनों ने नेत्रदान का निर्णय लिया। युग दधीचि नेत्रदान महायज्ञ के तहत कराए गए इस नेत्रदान से दो दृष्टिहीन व्यक्तियों को नई रोशनी मिलने की उम्मीद है।
गोविंद नगर में हुआ निधन, परिजनों ने लिया नेत्रदान का निर्णय
नेत्रदान अभियान प्रमुख मनोज सेंगर के अनुसार, स्व. दीपक भगत आगरा से कानपुर के गोविंद नगर स्थित अपनी बहन के घर आए हुए थे। बुधवार की मध्यरात्रि तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें गोविंद नगर स्थित रीजेंसी हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां उनका निधन हो गया।
इस दुखद घड़ी में भी परिवार ने सेवा और परोपकार की भावना का परिचय दिया। उनके जीजा संजय दुआ ने रात करीब 12 बजे मनोज सेंगर से संपर्क कर दीपक भगत के नेत्रदान की इच्छा जताई।
मेडिकल टीम ने पूरी की नेत्रदान की प्रक्रिया
सूचना मिलने पर मनोज सेंगर ने मेडिकल कॉलेज की नेत्र प्रत्यारोपण विशेषज्ञ डॉ. शालिनी मोहन से संपर्क किया। इसके बाद डॉ. शालिनी मोहन अपनी मेडिकल टीम के साथ मौके पर पहुंचीं और सम्मानपूर्वक नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी कराई।
अभियान से मिली जानकारी के मुताबिक, दान किए गए कॉर्निया का प्रत्यारोपण दो दृष्टिहीन व्यक्तियों में निःशुल्क किया जाएगा। इससे उन्हें दृष्टि प्राप्त करने का अवसर मिल सकेगा।
परिवार के फैसले ने दिया प्रेरणादायक संदेश
नेत्रदान की प्रक्रिया के दौरान स्व. दीपक भगत के जीजा संजय दुआ और अनिल नाकरा तथा बहन मीनाक्षी और अंजलि मौजूद रहीं। परिजनों के इस फैसले ने समाज को यह संदेश दिया कि किसी व्यक्ति के दुनिया से चले जाने के बाद भी उसका योगदान दूसरों के जीवन में खुशियां ला सकता है।
स्व. दीपक भगत का नेत्रदान उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो मृत्यु के बाद भी मानवता की सेवा करने की भावना रखते हैं। उनका यह योगदान दो लोगों के जीवन में नई उम्मीद और उजाले का माध्यम बनेगा।





