रिपोर्ट: शैलेन्द्र शानू वर्मा
बांदा। जनपद के वन विभाग में कथित भ्रष्टाचार, अवैध लकड़ी कटान और लकड़ी के कारोबार को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों के बीच विभाग में धर्मेंद्र नामक बाबू की लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनाती को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायतकर्ताओं ने मामले की निष्पक्ष जांच कराकर वन संपदा को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
आरोप है कि जिले में कुछ स्थानों पर कथित रूप से अवैध लकड़ी के कांटे संचालित हो रहे हैं और हरे-भरे पेड़ों की कटान की जा रही है। यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि कुछ लोगों को लकड़ी कटान की अनुमति दिए जाने की प्रक्रिया में अनियमितताएं हो सकती हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले में विभागीय जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
वर्षों से एक ही स्थान पर तैनाती को लेकर सवाल
वन विभाग में धर्मेंद्र नामक बाबू की लंबे समय से तैनाती को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि लकड़ी कारोबार से जुड़े कुछ लोगों को कथित मिलीभगत के जरिए लाभ पहुंचाया जा रहा है। अधिकारियों तक रकम पहुंचाए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं।
इन आरोपों के मद्देनजर संबंधित कर्मचारी की तैनाती, कार्यक्षेत्र और जिम्मेदारियों की जांच किए जाने की मांग उठ रही है। हालांकि, केवल लंबे समय तक एक ही स्थान पर तैनाती होना अपने आप में भ्रष्टाचार का प्रमाण नहीं है। मामले में आरोपों की पुष्टि संबंधित अभिलेखों और जांच के आधार पर ही हो सकती है।
अवैध लकड़ी कटान पर रोक लगाने की मांग
वन संपदा की सुरक्षा और अवैध कटान पर रोक लगाना संबंधित विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे में यदि जिले में बिना वैध अनुमति के पेड़ों की कटान या लकड़ी का कारोबार संचालित हो रहा है, तो इसकी जांच कर जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।
सवाल यह भी है कि संबंधित क्षेत्रों में संचालित लकड़ी के कांटों के लाइसेंस और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की नियमित जांच की जा रही है या नहीं। वन विभाग के अधिकारियों को शिकायतों की जांच कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि कहीं नियमों का उल्लंघन तो नहीं हो रहा है।
अभिलेखों की जांच से सामने आ सकती है सच्चाई
मामले में धर्मेंद्र नामक बाबू की तैनाती से संबंधित अभिलेखों, लकड़ी कटान की अनुमतियों, लकड़ी के कांटों के लाइसेंस तथा वन संपदा से जुड़े रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। इसके साथ ही संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच किए जाने की आवश्यकता बताई जा रही है।
यदि जांच में किसी कर्मचारी, कारोबारी या अधिकारी की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, जांच के माध्यम से निराधार आरोपों की स्थिति भी स्पष्ट हो सकेगी।
संबंधित कर्मचारी का पक्ष नहीं मिल सका
इस मामले में धर्मेंद्र नामक बाबू से आरोपों के संबंध में उनका पक्ष जानने के लिए फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। इसलिए इस खबर में उनका पक्ष शामिल नहीं किया जा सका है।





